THOI FORT SIKAR थोई किला, सीकर

Write BY:-Yogendra singh Tihawali

थोई THOI SIKAR एक ताम्रयुगीन सभ्यता काल में बसा एक अत्यन्त सुन्दर कस्बा है जिसके चारों ओर प्राचीन मंदिर और मठ है। यहां का सड़क मार्ग भी प्रमुख शहरों व कस्बों को जोड़ता है। यहां के पण्डित व व्यापारी विश्व के सभी कोनों में प्रसिद्ध हैं। यहां THOI SIKAR की प्राकतिक छठा बड़ी ही रमणीय है, जहां एक तरफ काली पहाड़ी तो दूसरी तरफ सफेद पत्थरों से बना पहाड़ और बीच में रेतीले टीले जो ठेट राजस्थान की याद दिलाते हैं।


काली पहाड़ी पर THOI SIKAR खण्डर किला विरासत कालीन राजाओं की याद दिलाता है। किले से संबंधित इतिहास में एक जानकारी यह भी है कि प्राचीन काल में एक सर्प इतना बड़ा था कि उसकी पूंछ के स्थान पर किला और मुंह के स्थान पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां की प्राचीन हवेलियों पर स्थित नक्कासी अजन्ता एलोरा की गुफाओं की याद दिलाती है।
थोई THOI SIKAR में प्राचीन काल में जहां मण्डी लगती थी वो स्थान आज चौपड़ बाजार के नाम से प्रसिद्ध है। थोई कस्बा चार मठों के मध्य स्थित है जिनमें गोपीनाथजी का मंदिर गोविन्द देवजी का मंदिर खाकी वाले बालाजी का मंदिर सालगराम जी का मंदिर प्रसिद्ध है वैसे तो कस्बे में काफी मंदिर है। यहां पंडितों की संख्या ज्यादा होने से थोई को पुरानी काशी भी कहा जाता था। यहां नृसिंह जी का मंदिर सीताराम जी का मंदिर गोपाल जी का मंदिर भी है जिनमें पंडितों द्वारा रोज पूजा पाठ होती है। प्राचीन काल में यहां छावनी हुआ करती थी जो कालान्तर में थाने में परिवर्तन हो गई वैसे तो थोई कस्बा तात्कालीन विरासत के राजाओं द्वारा जयपुर की तर्ज पर बसाया हुआ है। सन् 1952 में थोई विधानसभा क्षेत्र से राम राज्य परिषद पार्टी से पंडित रूपनारायण शास्त्री विधानसभा सदस्य चुने गये थे। कालान्तरण में यहां सरकारी सीएचसी अस्पताल पुलिस थाना निजी कॉलेज सीनियर स्कूल गल्स सीनियर स्कूल बैंक निजी स्कूल इंग्लिश मीडियम निजी स्कूलें व डाकघर तथा बिजली का 132 केवी पावर हाउस आदि विभाग खुले हुए है। कांतली नदी के बहाव क्षेत्र में स्थित थोई कस्बा अत्यधिक उपजाऊ क्षेत्र है जिससे यहां का किसान करीब करीब हर फसल उगाता है। यहां की पहाडी की चट्टानों में लोहे की मात्रा अधिक है। थोई आर्थिक राजनितीक सामाजिक व धार्मिक दृष्ठि से अत्यन्त ही स्मृद्धि कस्बा है। थोई में श्रीकृष्ण गौशाला भी है। है है जिसमें गायों की सेवा होती क्षेत्र के नीमकाथाना जयपुर रोड़ पर श्री दीनानाथ बालाजी का मंदिर जिससे आसपास के कस्बों के ग्रामीणों की गहरी आस्था है। यहां के महन्त श्री 108 श्री राजेन्द्र दास जी महाराज जिनके सानिध्य में भक्ति भाव का काफी विस्तार हुआ है। पिछले वर्ष यहां पर 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ का सफल आयोजन भी हुआ था जो इस क्षेत्र में पहली बार हुआ है। कस्बे की मिठाइयां भी सुप्रसिद्ध है जो दिल्ली मुबंई व कोलकाता तक जाती है।

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