तिहावली गांव का गौरवशाली लोक इतिहास Glorious folk history of Tihawali village
Write BY:- YOGENDRA SINGH TIHAWALI
तिहावली गांव का गौरवशाली लोक इतिहासराजस्थान की शेखावाटी भूमि अपनी वीरता, कला और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध रही है। इसी शेखावाटी क्षेत्र में सीकर जिले का एक ऐतिहासिक गांव है — तिहावली TIHAWALI जो मंडावा शहर से लगभग सात किलोमीटर उत्तर दिशा में, राज्य राजमार्ग SH-45 पर स्थित है। यह गांव न केवल अपने अतीत की कहानियों के लिए जाना जाता है, बल्कि आज भी यहां की विविध संस्कृति, परंपराएं और एकता इसे विशेष बनाती हैं।ऐतिहासिक पृष्ठभूमिकहा जाता है कि तिहावली का प्राचीन नाम “तलाई” था। उस समय यह स्थान गुसांईजी के मंदिर के लिए प्रसिद्ध था, जहां आज भी कामड़ जाति के लोग श्रद्धा से पूजा करते हैं। इसी पवित्र स्थल के पास जाट वंश की चाहर गोत्र की प्रथम बस्ती बसाई गई थी।लोक कहते हैं कि सीकर दरबार के काल में राजा कल्याण सिंह के शासनकाल के दौरान आंतरिक मतभेद उत्पन्न हुए। उन्हीं दिनों राजा बाघ सिंह के पिता दरबार से असंतुष्ट होकर बाहर निकल गए। राजा कल्याण सिंह ने उन्हें फतेहपुर रियासत के समीप तलाई नामक क्षेत्र में 600 बीघा भूमि बसने के लिए दी। लेकिन बाघ सिंह के पिता ने दृढ़ संकल्प लिया कि “सीकर रियासत का पानी मैं मरते दम तक नहीं पीऊंगा।” इसके पश्चात वे झुंझुनू जिले के खलासी गांव (मंडावा के निकट) में जाकर बस गए और वहां एक किला बनवाया।
माना जाता है कि उन्हीं के काल में “तलाई” का नाम बदलकर “तिहावली” रखा गया, और यही नाम इतिहास के पन्नों में अमर हो गया।सामाजिक संरचना और जनजीवनतिहावली गांव आज फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र का एक प्रमुख और बड़ा गांव है। यह रामगढ़ शेखावाटी तहसील की शान माना जाता है। यहां लगभग 7000 की आबादी निवास करती है, जिसमें अनेक जातियां सौहार्द और सम्मान के साथ रहती हैं।गांव में प्रमुख रूप से राजपूत (शेखावत), मुस्लिम (मुगल, भाटी, मणियार, कुरैशी, गौड़) और जाट समुदाय (चाहर, कुलहरि, बाना, दतुसलिया, नेहरा, दुलड़) के परिवार बसे हैं। इनके साथ-साथ अन्य जातियां जैसे खाती, नाई, रावणा राजपूत, कुम्हार, ब्राह्मण, नाईक और मेघवाल समुदाय भी रहते हैं। सब मिलकर यहां की सामाजिक एकता और सामूहिक संस्कृति को सशक्त बनाते हैं।धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वगांव का गुसांईजी मंदिर श्रद्धा और विश्वास का धरोहर स्थल है। हर वर्ष यहां धार्मिक आयोजन, मेला और भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें आस-पास के गांवों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। त्योहारों में गणेश चतुर्थी, दीपावली, तीज, होली और ईद यहां सामूहिक रूप से मनाई जाती हैं। गांव की गलियों में लोकगीतों और ढोल-नगाड़ों की गूंज आज भी पुराने शेखावाटी की झलक दिखाती है।शिक्षा और विकास यात्रासमय के साथ तिहावली ने शिक्षा और विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। गांव में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, और युवा पीढ़ी अब उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर रुख कर रही है। कई युवक सरकारी सेवा, सेना और व्यापार में सफल भूमिका निभा रहे हैं।कृषि यहां की मुख्य आजीविका है, जिसमें बाजरा, गेंहू, चना और सरसों प्रमुख फसलें हैं। गांव में बिजली, सड़क, पानी और मोबाइल इंटरनेट जैसी सुविधाएं अब सामान्य जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं, जिससे यहां का जीवन स्तर निरंतर बेहतर हो रहा है।तिहावली की पहचानतिहावली केवल एक गांव नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और आत्मसम्मान की जीवंत मिसाल है।
यहां का हर परिवार अपनी मिट्टी से जुड़ा है और हर गली अपनी पहचान में शेखावाटी की परंपरा की खुशबू समेटे है। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, तिहावली का अर्थ ही है “त्याग, इतिहास और हिम्मत की भूमि।”
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